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हरीश कंडवाल "मनखी "

Romance Fantasy

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हरीश कंडवाल "मनखी "

Romance Fantasy

लिख के मिटा दिया

लिख के मिटा दिया

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आज पुराने रंजिशों को लिखकर मिटा दिया

जिनसे थी शिकायत, उन्हें भी गले लगा दिया।


आज हमने जो कुछ खोया था उसे भुला दिया

गमों की दुनिया को रेत पर लिखकर मिटा दिया।।


मिले थे जो खत उनके, आज फिर से पढ़ लिया

उनकी यादों को पन्नों में लिखकर सहेज दिया।।


यादों में उनकी छवि को फिर से संवार लिया

दिल में छूटे अरमानों, को आज यही मिटा लिया।।


अब नहीं रही उनमें वह बात, इस बात को समझ लिया

दिल तो नादान है, खुद को ही उनसे दूर कर लिया।।


अब किसी को क्या समजाये वफ़ा की परिभाषा

जब वक्त ही बना देता है, प्यार और दोस्ती का तमाशा।


आज उन सब तमाशो को, कब्र में गाड़ दिया

मोहब्बत जिंदा है आज भी, यह दिखा दिया।।


खुली पन्नों की किताब में, जज़्बातों को उकेर दिया

बस आखिर में उनका नाम लिखकर मिटा दिया।।




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