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हरीश कंडवाल "मनखी "

Classics

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हरीश कंडवाल "मनखी "

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हवा का झोखा

हवा का झोखा

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 हवा का एक झोखा
 जो हिला सकता है,
 पेड़ पौधा, धरती,
 आलीशान भवन,
और मिट्टी का टीला।

 हवा का झोखा,
 जो बदल सकता है
पानी का रास्ता,
 समुद्र की लहरों की रेखा।

 हवा का झोखा,
 जो बदल सकता है
 बादलों से घिरा आकाश,
 ला सकता है बड़ा तूफान।

 हवा का एक झोखा
 जो बदल सकता है,
 तपती सूरज की गर्मी
 तोड़ सकता है,
बर्फ का पहाड़।

 हवा का एक झोखा
 जो बदल सकता है
मौसम का मिजाज,
 ला सकता है, धूल ही धूल।

 हवा का एक झोखा
जो बदल सकता है,
 चलते इंसान की राह
 और दुनिया की चाह।

 हवा का एक झोखा
 बदल सकता है
 बड़े बड़े जहाजों का रूख,
 वह बदल सकता है,
दुनिया का दिखावा झूठा सुख।

हरीश कंडवाल "मनखी" कलम से। 



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