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हरीश कंडवाल "मनखी "

Inspirational

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हरीश कंडवाल "मनखी "

Inspirational

सड़क

सड़क

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 इंसान भी गाड़ी की तरह
जीवन के सड़क पर
 हर रोज दौड लगाता है।
 
जीवन के सड़क पर जब
 इंसान रूपी गाड़ी चलती है
तब कई जगह सड़क सपाट,
कई उबड़ खाबड़, उतार चढ़ाव
संकरी, चौड़ी, खड्डे, सब आते हैं।

गाड़ी चलाते समय
 कुछ पीछे रह जाते हैं,
 कुछ आगे, दायें बायें
 हमेशा कोई ना कोई
 साथ चलता रहता है।

 गाड़ी चलाते समय
 तीन लाईट आती है
जो रूकने, इंतजार करने
और चलने का इशारा करती हैं।

 जीवन के रप्तार में भी
 तीन सिग्नल मिलते हैं
 समझने, परखने और संभलने
जो इन सिग्नलों को पहचानता है
वह अपनी मंजिल को पा लेता है।

 जीवन जब सपाट सड़कों पर दौडता
 तब इंसान किसी को कुछ नहीं समझता
 जैसे ही जीवन में घुमावदार मोड़ आता
या कोई गड्ढा आता, तब संभलकर चलता।

 जीवन यात्रा के पड़ाव में
 कई ब्रेक संभलने के लगते हैं
जो समझ जाता है, वह संभलता है,
जो जीवन चक्र को नहीं समझ पाता है,
उसका पर्दा वहीं पर गिर जाता है।


 हरीश कण्डवाल मनखी कलम से


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