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Yogeshwar Dayal Mathur

Abstract

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Yogeshwar Dayal Mathur

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लगाव

लगाव

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बड़े चाह से 

थामना चाहा था हथेली पर

बारिश की गिरती बूंदों को

फिसलकर निकल गईं सब बूंदें

बगैर किसी लगाव के

जिंदगी की खुशियों की तरह

हथेली को गीला छोड़ गईं

बिदाई पर नम आंखों की तर


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