STORYMIRROR

मानसिंह मातासर

Drama

3  

मानसिंह मातासर

Drama

लाल बत्ती

लाल बत्ती

1 min
318

अक्सर हर चौराहे पर ये,

अनायास दिख जाती है।

कब चलना कब रुकना,

ये बराबर हमें बताती है।


दिखती थी कभी नेता की,

महँगी-महँगी उन कारों पर।

खूब अकड़ते रौब जमाते,

और उछलते फिर नारों पर।


हर जगह फैला है खतरा,

भोली जनता है पिस रही।

रसूखदारों के रुतबे के आगे,

नाक अपना है घिस रही।


बत्ती-बत्ती में ढूंढ़ो अंतर,

ज्ञान करलो अपने अंदर।

खतरे की हैं ये दोनों बत्ती,

लाल बत्ती भाई लाल बत्ती।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama