STORYMIRROR

Payal Sawaria

Tragedy

2  

Payal Sawaria

Tragedy

लाचार

लाचार

1 min
196

ग़रीब की आज झलक देखी बीच बाजार

सिलवट पड़ी ललाट पर देखी कई हजार 

भूख मिटाने के लिए आँख दिखी लाचार।। 


लाचार आँख में बसी थी भोजन की प्यास

जीवन शैय्या पर लिये क्षणिक सुखों की आस

सोयी पड़ी थी कब से वो अर्धनग्न जिंदा लाश।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy