Payal Sawaria
Tragedy
ग़रीब की आज झलक देखी बीच बाजार
सिलवट पड़ी ललाट पर देखी कई हजार
भूख मिटाने के लिए आँख दिखी लाचार।।
लाचार आँख में बसी थी भोजन की प्यास
जीवन शैय्या पर लिये क्षणिक सुखों की आस
सोयी पड़ी थी कब से वो अर्धनग्न जिंदा लाश।।
जीवन बेहाल हो...
पंचतत्वों की ...
धूल बन पीछा क...
'अपराध छिपाती...
करनी के फल
प्रमाण दो
इस तरह तो
लाचार
छाँव देता वृक...
सेल्फी
अकेले कैसे छोड़ सकती हूँ! उससे कैसे मुख मोड़ सकती हूँ!! अकेले कैसे छोड़ सकती हूँ! उससे कैसे मुख मोड़ सकती हूँ!!
ऐसे में हम कैसे दावा करें कि व्यवस्थाओं में हम पूरे सक्षम ऐसे में हम कैसे दावा करें कि व्यवस्थाओं में हम पूरे सक्षम
चारों तरफ जानवरों का मेला है, न जाने क्या सोच रहा वो इंसान हैं। चारों तरफ जानवरों का मेला है, न जाने क्या सोच रहा वो इंसान हैं।
कैसी है ये बेबसी कैसी ये लाचारी है भूख से दुनिया हारी है। कैसी है ये बेबसी कैसी ये लाचारी है भूख से दुनिया हारी है।
लड़ रहे लोग उससे जी तोड़ परिश्रम कर यहाँ लड़ रहे लोग उससे जी तोड़ परिश्रम कर यहाँ
तेरे जाने का गम क्यों कम नहीं होता सलता रहता है। तेरे जाने का गम क्यों कम नहीं होता सलता रहता है।
आओ मिलकर खाएं खाएं एक कसम। आओ मिलकर खाएं खाएं एक कसम।
ज़िंदगी फटी हुई इक किताब सी रही रोज़ इस किताब का सफ़्हा इक उतर गया ज़िंदगी फटी हुई इक किताब सी रही रोज़ इस किताब का सफ़्हा इक उतर गया
ख़ुशामदी टट्टुओं का ही तो अब चलता है सिक्का इस दुनिया में। ख़ुशामदी टट्टुओं का ही तो अब चलता है सिक्का इस दुनिया में।
इक याद तेरी आती है और दर्द बढ़ जाता है तुझे ये हरे ज़ख्म नहीं दिखते। इक याद तेरी आती है और दर्द बढ़ जाता है तुझे ये हरे ज़ख्म नहीं दिखते।
बस जी रहे है, पीड़ा के साथ जैसे निकल रही हो अर्थी की बारात. बस जी रहे है, पीड़ा के साथ जैसे निकल रही हो अर्थी की बारात.
कर दी है क्या दशा, औलाद ने माँ - बाप की। मिला दी मिट्टी में इज्जत, औलाद ने माँ-बाप की। कर दी है क्या दशा, औलाद ने माँ - बाप की। मिला दी मिट्टी में इज्जत, औलाद ने म...
कहाँ से शुरू करें ज़िन्दगी शुरू कहांँ से होती है। कहाँ से शुरू करें ज़िन्दगी शुरू कहांँ से होती है।
कर दिया है राम,तुमको बहुत बदनाम। तेरे ही भक्तों ने, करके ऐसे बदकाम।। कर दिया है राम,तुमको बहुत बदनाम। तेरे ही भक्तों ने, करके ऐसे बदकाम।।
लौटते वक्त मायके से नयन भर जाते हैं। लौटते वक्त मायके से नयन भर जाते हैं।
अजी अपने ही आलम में मगन सब लोग रहते हैं। बहुत हैं व्यस्त जीवन में यही सब लोग कहते हैं। अजी अपने ही आलम में मगन सब लोग रहते हैं। बहुत हैं व्यस्त जीवन में यही सब लोग ...
बेवफाई तुमने की या मैंने की ये रब जानता है। बेवफाई तुमने की या मैंने की ये रब जानता है।
हुनर हो तो कोई कभी भूखा नहीं मर सकता। हुनर हो तो कोई कभी भूखा नहीं मर सकता।