STORYMIRROR

Payal Sawaria

Abstract

4  

Payal Sawaria

Abstract

धूल बन पीछा करते सतरंगी पल

धूल बन पीछा करते सतरंगी पल

1 min
339

वो सतरंगी पल

धूल बन आज भी पीछा

करते रहते हैं प्रतिपल।

वो जीवन की पगडण्डी

पर एक दूजे का हाथ थामें 

रिश्ता बढ़ता रहा हर क्षण

डगमग न हुये कदम हमारे

चाहे आये हो लाख तूफान भीषण।

इंद्रधनुष सा रंगीन हो 

सजता संवरता रहा तेरा मेरा जीवन

प्रेम के झरनों में भीग एक दूजे से 

जुड़ता रहा आत्माओं का बंधन।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract