STORYMIRROR

Payal Sawaria

Abstract Action

4  

Payal Sawaria

Abstract Action

पंचतत्वों की देह

पंचतत्वों की देह

1 min
484

क्षणभंगुर से जीवन

की क्यों है इतनी खेर

ज्ञात है ये मर्म

कि है पंचतत्वों की देह 


वो भी ईश्वर की देन

जिसका तय है मृत्यु से मेल

फिर क्यों है हर एक 

मोह में बंधकर

यहां पूछता फिरता 


भगवान क्यों हो रहा 

सृष्टि पर ये सब फेर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract