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Diksha Gupta

Tragedy

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Diksha Gupta

Tragedy

क्यों करते हैं वे ऐसा?

क्यों करते हैं वे ऐसा?

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बाबा, तेरी अँगुली जो छोटी तो डर लगता है

डर लगता है,

टॉफ़ी और जलेबी की अपनी लालच से,

नए बने अंकल और उनकी चाचनी बंधे बातों से

ऐसे में अगर, मेरी पसंद एक खौफ बन जाए,

तो इतना न सोचना, पर पुछना,

क्यों करते हैं वे ऐसा?

मईया, मेरी आवाज़ नही आती क्या?

तेरे आँचल का अंबर नही है यहाँ,

न मेरी गुड़िया सिरहाने रखी है|

इस घर कोई नही मुझे घर पहुचाने को,

ऐसे में अगर, मै अपना घर ही भूल जाऊँ,

तो इतना न सोचना, पर पुछना,

क्यों करते हैं वे ऐसा?

उजाले में आँखे नही खुलती,

अँधेरा चीख और दर्द का यार बना बैठा है|

कृष्ण भी अपनी कृष्णा(द्रौपदी) को भूल गयें हैं शायद

जो आज हर घर रावण राम बना बैठा है|

ऐसे में अगर, कुछ मंदिर मस्जिद विरान हो जाए,

तो इतना न सोचना, पर पुछना,

क्यों करते हैं वे ऐसा?

उन भेड़ियों ने नोचा है

मेरे शरीर को, मेरी रुह

को अपने पंजों तले रौंदा है|

इंसान की अदालत में खड़े,

तुम उन जानवरों का मजहब पूछते हो|

ऐसे में अगर, एकलौता धर्म(इंसानियत) भी खत्म हो जाए,

तो इतना न सोचना, पर पुछना,

क्यों करते हैं वे ऐसा?

इंसाफ, हक़ीकत में होता है क्या?

अब फर्क नही पड़ता|

इज्जत की कफ़न कहीं मिलती हो

तो ओढ़ा देना|

आने वाले वक़्त में कुछ ऐसा करना,

मेरी बहनों को बचा लेना|

ऐसे में अगर, उस वक़्त मुझे भूल भी जाओ,

तो इतना न सोचना, पर पूछना,

क्यों करते हैं वे ऐसा?



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