Bhoop Singh Bharti
Thriller
प्यारी सी ये बून्द है, रहे मेघ के संग।
इससे ही बिखरे सदा, जीवन के सब रंग।
जीवन के सब रंग, संग ये लेकर आये।
बनकर के बरसात, धरा की प्यास बुझाये।
चातक की ये प्यास, आन मिटाये सारी।
बने सीप मुख देख, बून्द मोती सी प्यारी।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
अपना दिल तोड़कर बिखेर दिया कैसी ये हयात....!! अपना दिल तोड़कर बिखेर दिया कैसी ये हयात....!!
उमर गई तो... मेंहदी गई..! समय आता नहीं हैं। बदलाव होता हैं। ओर तेरी मेंहदी, वो भी उमर गई तो... मेंहदी गई..! समय आता नहीं हैं। बदलाव होता हैं। ओर तेरी ...
चलो कहीं घूमने चलते हैंं, कहीं दूर भूल सब कहीं विचरते हैं। चलो कहीं घूमने चलते हैंं, कहीं दूर भूल सब कहीं विचरते हैं।
वो बंद कर लेती हैं दिल के वातायन छिप जाएं नयन, शर्माए बदन.. वो बंद कर लेती हैं दिल के वातायन छिप जाएं नयन, शर्माए बदन..
इनकी हिफाज़त में ही हमारी कई सैनिकों ने दी कुर्बानियाँ है। इनकी हिफाज़त में ही हमारी कई सैनिकों ने दी कुर्बानियाँ है।
अब तो दिल ही नहीं कहता छोड़कर जाने का। जो इक मुलाकात में आहें भर बैठे।। अब तो दिल ही नहीं कहता छोड़कर जाने का। जो इक मुलाकात में आहें भर बैठे।।
इतनी सुगंधित कैसे, तुझे गुनगुनाना होगा। आज तुझे बताना होगा।। इतनी सुगंधित कैसे, तुझे गुनगुनाना होगा। आज तुझे बताना होगा।।
अब नजर नहीं आता कहीं छिप गया शायद। अब नजर नहीं आता कहीं छिप गया शायद।
पतझड़ का भी अलग रंग है सुख के बाद दुख का अनुभव है पतझड़ का भी अलग रंग है सुख के बाद दुख का अनुभव है
राह चले जो भीम की, उसे करो मतदान।। राह चले जो भीम की, उसे करो मतदान।।
देश किया खुशहाल, नमन हो नायक अपने। देश किया खुशहाल, नमन हो नायक अपने।
ये धन दौलत और शान ए शौकतइसे मैंने आज जी भरकर जिया। ये धन दौलत और शान ए शौकतइसे मैंने आज जी भरकर जिया।
वो शिशिर की प्रभात वो गहराता अति कोहरा। वो शिशिर की प्रभात वो गहराता अति कोहरा।
महबूब से मुलाकात पर अब अज़ल नहीं लिखते। महबूब से मुलाकात पर अब अज़ल नहीं लिखते।
भीमराव की सीख से ही, स्वशासन के राज मिले। भीमराव की सीख से ही, स्वशासन के राज मिले।
किसी की कामयाबी पर कभी भी मत जलन करना। किसी की कामयाबी पर कभी भी मत जलन करना।
सपनों की दुनिया में खोया हुआ खुद को मैं पाती हूँ। सपनों की दुनिया में खोया हुआ खुद को मैं पाती हूँ।
ऐसे ही गुज़रे थे उस रात की दो पल बस दिल ही दिल में होता था हलचल। ऐसे ही गुज़रे थे उस रात की दो पल बस दिल ही दिल में होता था हलचल।
क्या कहूं उनकी परछाई मेरी आंखों में मचलती हैं। क्या कहूं उनकी परछाई मेरी आंखों में मचलती हैं।
जमाना पलट गया हैं, अपने ही दौर पर, कुछ तो बोलो मुझसे दिल मिलाकर..! जमाना पलट गया हैं, अपने ही दौर पर, कुछ तो बोलो मुझसे दिल मिलाकर..!