Bhoop Singh Bharti
Thriller
प्यारी सी ये बून्द है, रहे मेघ के संग।
इससे ही बिखरे सदा, जीवन के सब रंग।
जीवन के सब रंग, संग ये लेकर आये।
बनकर के बरसात, धरा की प्यास बुझाये।
चातक की ये प्यास, आन मिटाये सारी।
बने सीप मुख देख, बून्द मोती सी प्यारी।
झूमता बसंत है
कुंडलिया : "म...
कुंडलिया
कुंडलिया : "प...
हाइकु : नव वर...
रैड क्रॉस
गीत
कहीं देवदार के पेड़, कहीं चीड़ सामने खड़े हैं यहाँ के मौसम के भी, सूना है मिज़ाज बड़े हैं कहीं देवदार के पेड़, कहीं चीड़ सामने खड़े हैं यहाँ के मौसम के भी, सूना है मिज़ाज...
जो खयाल कभी आया नहीं क्या यह वह हकीकत है जो खयाल कभी आया नहीं क्या यह वह हकीकत है
इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे। इस निविड़ बने जीवन में फिर से आनंद की इक लहर बह जाने दे।
जो मिट गया, वही बचा है, यही सत्य समझ में आए। न चंदन की महक बसे है, न फूलों की गंध यहाँ जो मिट गया, वही बचा है, यही सत्य समझ में आए। न चंदन की महक बसे है, न फूलों की...
दो सिक्कों के लिए उसको गिरवीं रखते देखा है। दो सिक्कों के लिए उसको गिरवीं रखते देखा है।
अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्ण से सत्य अधर्म राह का करके पालन और असत्य का उच्चारण , धर्मराज से धर्म लुप्त था और कृष्...
हमारी ज़रूरत के लिए, हम अच्छे कमरे आसपास में ढूँढ़ने लगे। हमारी ज़रूरत के लिए, हम अच्छे कमरे आसपास में ढूँढ़ने लगे।
एक तरफ था पर्वत उंचा और एक तरफ गहरी थी खाई एक तरफ था पर्वत उंचा और एक तरफ गहरी थी खाई
स्वच्छ हो भारत, स्वस्थ रहें सब - ये सन्देश जन-जन तक पहुँचाना है, स्वच्छ हो भारत, स्वस्थ रहें सब - ये सन्देश जन-जन तक पहुँचाना है,
प्रेम और भक्ति से बुराई पराजित हो जाता है । प्रेम और भक्ति से बुराई पराजित हो जाता है ।
हां, मैं महिला हूं शायद इसीलिये ये सब कर पाती हूं। हां, मैं महिला हूं शायद इसीलिये ये सब कर पाती हूं।
जवान बेटे पर हाथ जैसे बाप का नहीं चलता। जवान बेटे पर हाथ जैसे बाप का नहीं चलता।
माँग रही है सदा सदा को साथ अपने पिया का, तुम बस दोनों को लम्बी उम्र की राह चुनते जाना। माँग रही है सदा सदा को साथ अपने पिया का, तुम बस दोनों को लम्बी उम्र की राह चु...
मैं लिखना चाहता हूँ गहरे जख्मों की कहानियां। मैं लिखना चाहता हूँ गहरे जख्मों की कहानियां।
भूखी मरती चली गई, क्या हसीन चेहरा, लगता थी कि देवता भी, देते आये पहरा।। भूखी मरती चली गई, क्या हसीन चेहरा, लगता थी कि देवता भी, देते आये पहरा।।
जो शब्द से परे हो एक हाथ जो हाथ नहीं उसके होने का आभास हो जो शब्द से परे हो एक हाथ जो हाथ नहीं उसके होने का आभास हो
फिर आहिस्ता-आहिस्ता अपनी नम प्रेम भूमि को कर देती हूँ समर्पण फिर आहिस्ता-आहिस्ता अपनी नम प्रेम भूमि को कर देती हूँ समर्पण
वो जवानी कहां? वो कहानी कहां? जो प्रेम में बुझ गई। वो जवानी कहां? वो कहानी कहां? जो प्रेम में बुझ गई।
अभी नादान है दिल कुछ समझता नहीं है इश्क की छांव में थोड़ा बड़ा तो होने दीजिए। अभी नादान है दिल कुछ समझता नहीं है इश्क की छांव में थोड़ा बड़ा तो होने दीजिए।
कटे हुए नर मस्तक थे जो , उनको हाथ दबाया। कटे हुए नर मस्तक थे जो , उनको हाथ दबाया।