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Kanak Agarwal

Abstract Tragedy Classics

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Kanak Agarwal

Abstract Tragedy Classics

कुमकुम

कुमकुम

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अक्षत भरा कलश गिरा

कुमकुम में पैर रंगा

पदचिह्नों की छाप छोड़ती


अरमानों की गठरी लिए

चौखट पार करती नववधू

कहाँ जानती थी।


धन का लालच

बदल देगा

उस प्रेममयी कुमकुम को

रक्तरंजित छाप में।


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