STORYMIRROR

Kanak Agarwal

Abstract Tragedy Classics

4  

Kanak Agarwal

Abstract Tragedy Classics

कुमकुम

कुमकुम

1 min
190

अक्षत भरा कलश गिरा

कुमकुम में पैर रंगा

पदचिह्नों की छाप छोड़ती


अरमानों की गठरी लिए

चौखट पार करती नववधू

कहाँ जानती थी।


धन का लालच

बदल देगा

उस प्रेममयी कुमकुम को

रक्तरंजित छाप में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract