कुछ सपने हैं मेरे
कुछ सपने हैं मेरे
कुछ सपने हैं मेरे
अगर वक़्त हो तो सुनाऊँ क्या?
बचपन से अब तक की
मेरी सारी कहानी बताऊँ क्या?
अपने सज़दे में की हुई
एक इबादत आपको बनाऊँ क्या?
मेरे अपनों की दुनिया में
एक नाम आपका भी सजाऊँ क्या?
कहीं साथ छोड़ तो ना दोगे
दिल के कारागार में बंदी आपको बनाऊँ क्या?
कुछ सपने हैं मेरे
अगर वक़्त हो तो सुनाऊँ क्या?

