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Dr.Narendra kumar verma

Fantasy

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Dr.Narendra kumar verma

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कृष्ण है तो संभव है

कृष्ण है तो संभव है

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कृष्ण है तो संभव है, संतोष का तृप्त करना,

अचरज लीलाओं का संभव करना,

व्यथित मन में भी सुंदर सुशोभित करना, 

बरखा संग हरियाली चमकना!


कृष्ण है तो संभव है, गोकुल की गोपियों का थिरकना,

बंसी पर राधा का संवरना, 

रास के श्रृंगार का माधुर्य होना 

सुगंधित फूलों पर भंवरों का चलना!


कृष्ण है तो संभव है, अर्जुन के संकल्प रथ पर चढ़ना,

महाभारत में सकल ताज का धारण करना!

कालिया नाग पर जय नृत्य करना, 

चांद सूरज का तेज अमर!


कृष्ण है तो संभव है, पाताल लोक का काल भी,

घोर मित्रता का वचन भी,

हार पर ताज भी, अजय का राज भी, 

पृथ्वी का रक्षण भी, सृष्टि का उद्धार भी!


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