कोरोना
कोरोना
चंद लोग खुश हैं आज,
कि कोरोना ने आज परिवार से मिलाया है।
पर गरीब / भूखा बैचैन है आज,
क्यूंकि वो आज फिर भूखे पेट सोया है।
अमीर अपने जहाज से उतर चुका है,
खुद को एक कमरे में कैद कर रखा है।
लेकिन उस गरीब का क्या ?
जो अभी भी दो रोटी की तलाश कर रहा है।
कितना अजीब है ये कहना !
उससे भी अजीब है, ये सुनना।
कि कुछ लम्हों के लिए अपने घर पर रहो,
खाओ - पियो और परिवार के साथ रहो।
पर उस गरीब /भूखे इंसान का क्या ?
जो, एक वक्त की रोटी के लिए,
अभी अपने घर से बाहर निकला है।
इसी सोच में, कि क्या पता,
आज कुछ काम ही मिल जाये ?
और शायद उसकी भूख मिट जाये।
