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Sarita Dikshit

Romance

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Sarita Dikshit

Romance

कोई शिकवा नहीं, कोई गम नहीं

कोई शिकवा नहीं, कोई गम नहीं

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कोई शिकवा नहीं कोई गम नहीं

तेरी बेरुखी का ज़ख्म कोई कम नहीं

जब उलफ़त हीं नहीं दौलत मे शुमार

सारे जहाँ की दौलत का भरम नहीं


तेरे मेरे साथ की दुहाई देते थे सब

पाक मुहब्बत में हमारी, वो देखते थे रब

अब तू नहीं ,तो रब का करम नहीं

सारे जहाँ की दौलत का भरम नहीं


तेरे जख्म को भी अपना बना लिया हमने,

तेरी यादों से रातें सजा लिया हमने

इन आँसुओ का कोई मरहम नहीं

सारे जहाँ की दौलत का भरम नहीं


कभी आओ जो ख्वाबों में मेरे

बनकर मेरी मुहब्बत का मसीहा

देखना उन निगाहों मे हो, कोई शरम नहीं

सारे जहाँ की दौलत का भरम नहीं


इक बात गिरह में बांध लो तुम

ना मानो , फिर भी मान लो तुम

मुहब्बत से बड़ा कोई धर्म नहीं

सारे जहाँ की दौलत का भ्रम नहीं।


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