कोई गैर नहीं हुं मै
कोई गैर नहीं हुं मै
हटा दे ये घूंघट मुख से तेरा,
दिल दे चुका हूं मै,
ईश्क करता हुं मे दिल से तुझको,
कोई गैर नहीं हूं मै।
देखना चाहता हूं चहेरा तेरा,
नजरें मिलाउंगा मै,
नजरों के ज़ाम पी कर रहुंगा,
मदहोंश बनुंगा मै।
अब न छूपा तु चहेरा तेरा,
तड़पता रहा हुं मै,
ईश्क करता हुं मै दिलसे तुझको,
कोई गैर नहीं हुं मै।
सूनुंगा मै मुख से लफ्ज तेरा,
दिल में उतारुंगा मै,
तेरी जुल्फों के सायेमें बैठकर,
गज़ल गाउंगा मै।
दिखा दे खूबसूरत चहेरा तेरा,
प्यासा बन रहा हूं मै,
ईश्क करता हूं "मुरली" तुझको,
कोई गैर नहीं हूं मै।

