STORYMIRROR

Suresh Sangwan

Abstract Romance

4  

Suresh Sangwan

Abstract Romance

कोई अच्छी लगी है सूरत क्या

कोई अच्छी लगी है सूरत क्या

1 min
155

कोई अच्छी लगी है सूरत क्या

हो गई है तुम्हें मुहब्बत क्या


दे तो दूँ दिल निकाल के तुमको

रख सकोगे इसे सलामत क्या


बेचने के लिए नहीं रक्खा

तुम लगाते हो दिल की क़ीमत क्या


फूल सारे हसीन होते हैं

तुम अगर हो तो इसमें हैरत क्या


कौन सा दर्द खाए जाता है

हो गई आपकी ये हालत क्या


वक़्त ही आपको बतायेगा

ख़्वाब क्या है मियाँ हक़ीक़त क्या


हो इजाज़त तो हम चले जाएँ

है हमारी अभी ज़रूरत क्या


कोई हमको भी टूटकर चाहे

साथ ही जायेगी ये हसरत क्या


जीते जी तो नहीं मिली मुझको

मर के ही अब मिलेगी फ़ुरसत क्या


जिसको देखो उदास लगता है

शहर में आ गई है आफ़त क्या।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract