STORYMIRROR

Karil Anand

Abstract

4  

Karil Anand

Abstract

सत्य का  स्वरूप

सत्य का  स्वरूप

1 min
381

सच सुनते ही सकपका जाते है

झुझंला जाते है

किसी के दर्द पर मुस्कुराते है

स्वयं को नहीं देखते

दूसरों के दोष गिनवाते है लोग


छलावा और दिखावा खुद करते है

नकाबपोशी का इल्जाम लगाते है लोग

दूसरों के गमों में मजा लेने वालों


 अपने आप पर ना इतराए

दोषारोपण छोड़कर आत्ममंथन पर

ध्यान लगाए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract