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मिली साहा

Romance Tragedy Fantasy

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मिली साहा

Romance Tragedy Fantasy

कल्पना को हकीकत समझ बैठा

कल्पना को हकीकत समझ बैठा

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बड़ी शिद्दत से चाहने लगा था जिसे,

उसे तो सुध भी नहीं थी इस दीवाने की,

फिर भी जाने क्यूँ, इंतजार में ही,

गुज़र रही थी हर शाम ये ज़िन्दगी मेरी।।


मोहब्बत का ये एकतरफा सफ़र 

पर बड़ी ही खूबसूरत थी इसकी डगर,

दूर से ही छुप छुप कर देखा जिसे,

पहली नज़र में भी मोहब्बत बन गई मेरी।।


कहना था, बहुत कुछ उससे,

पर दिल की बात रह गई दिल में ही,

मोहब्बत में तो करता था मैं, बेइंतेहा उससे,

पर इज़हार की हिम्मत नहीं थी मेरी।।


सजाने लगा था ख़्वाब दिल ही दिल में,

खोता ही गया मैं उसके इश्क़ में,

शादी में झलक रही इसकी सुंदरता ऐसी जैसे,

वो है आसमां से उतरी हुई कोई परी।।


निर्मल बहती नदी की धारा सी वो,

अनजान ज़िंदगी के हर ग़म से,

संगमरमर तराश कर बनाई हुई कोई मूरत जैसी,

मन खुश दे रही थी शीतलता भरी दुपहरी।।


उम्मीद लगा बैठा था मोहब्बत में बेहिसाब

मोहब्बत की उन गलियों में,

उसे हमसफ़र बनाने के सजाने लगा ख़्वाब,

उसे ही समझ बैठा ज़िन्दगी मेरी।।


मेरे तसव्वुर की जो मलिका,

उसे तो इल्म भी नहीं था इसका,

ख़्वाबों में बनी थी प्यार की जो कश्ती,

डूब गई वो तो ख़्वाबों में ही मेरी।।


अंधियारी रात हो गई ज़िन्दगी,

जिसकी न मंजिल है, न कोई ठिकाना,

शुरू होने से पहले ही ख़त्म हो गई,

मोहब्बत की सुखद कहानी मेरी।।


एक ऐसी कहानी जिसका किरदार था

हकीकत नहीं बस मेरी कोरी कल्पनाओं में,

खुद से ही बना लिया था एक व़जूद मैनै,

जिसे समझ बैठा था मोहब्बत मेरी।।


पर कल्पना को हकीकत समझ,

खुद को धकेलता ही चला गया उस ओर,

पर किसी झटके में जैसे नींद से जगाया मुझे,

और कहा इस जमीं पर है तकदीर तेरी।।


जिसे ढूंढ रहा तू अपने ख्यालों में,

वो तो है तेरे आसपास भी नहीं,

रोज मजदूरी कर खाने वाला तू है इंसान,

कहांँ से मिलेगी तुझे कोई हुस्न परी।।


उस ख्याल का कुछ ऐसा हुआ असर, 

कि मानने को दिल नहीं था तैयार,

उस काल्पनिक दुनिया की उस माया से,

आजादी नहीं हो पा ही थी मेरी।।


ताउम्र करता रहा मैं तन्हा सफ़र,

जो थी ही नहीं उसी के यादों की चादर ओढ़,

चाह कर भी भुला नहीं पा रहा था मैं उसे,

जो ख्यालों में ही सही मोहब्बत थी मेरी।।


उम्र का आखिरी पड़ाव है ये मेरा,

थक चुकी हैं आँखे हकीकत के इंतजार में,

पर कल्पना तो कल्पना ही होती है,

मिलता कुछ नहीं हो जाती ज़िंदगी दोहरी।।


बची खुची गिनती की कुछ साँसे है,

पर वो सूरत आँखों से है कि जाती नहीं,

अब तो यही तस्वीर आँखों में लेकर,

ये जिंदगी इस दुनिया से रुखसत होगी मेरी।।



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