कितने पास हो तुम
कितने पास हो तुम
एक मौन सा अहसास हो तुम,
मेरी रूह की आवाज़ हो तुम !
मैं जो पढ़ न सका वो किताब हो तुम,
ज़ुबाँ के अनकहे से अल्फाज़ हो तुम !
तन्हाईयों का मेरी जवाब हो तुम,
नींद का अधूरा सा ख़्वाब हो तुम !
सोये हुये थे जो मेरे वो जज्बात हो तुम ,
कहा न जो तुम ही से, वो राज हो तुम !
मेरी धड़कन और मेरी सांस हो तुम,
दूर होकर भी मेरे कितने पास हो तुम !

