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Madhu Gupta "अपराजिता"

Tragedy

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Madhu Gupta "अपराजिता"

Tragedy

"कितने नाम से जानी जाती "

"कितने नाम से जानी जाती "

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मेरे है ना जाने कितने नाम 

मैं हूँ उन अनगिनत नामों से बदनाम

हूँ मैं शौक मर्दों का

कहलाती हूँ वेश्या और कॉल गर्ल‍

इसी लिए समाज में किसी को ना भाती....!! 

मेरी पीड़ा मेरा दर्द

शायद ही जाने कोई यहाँ

हूँ मैं तिरस्कृत इस समाज में

देख हर कोई कह चरित्र हीन मुझे

हैं इसके पीछे कौन

जाने हर कोई यहाँ 

है मूक बना इस बात से समाज सदा...!! 

जब चाहा उंगली उठा दी

है फ़िक्र इन्हें क्या नारी क्या है

छलनी कर के हर पल ख़ुद को

जिस्म का वो कारोबार है करती

तब पालन -पोषण करती खुद का 

औरों के आगे हाथ ना धरती....!! 

रातों को जो कोठों पे हैं जाते

दिन के उजालों में वो ही उनको

बदचलन और वेश्या कहते

जिनके शौक को करती पूरा

वही खुद को चरित्रवान 

और उसको चरित्रहीन बतलाते....!! 

दोष क्या है मेरा बतलाओ

किसने मुझे कोठे पे बिठाया

किसने दिया यह गुमनाम सा जीवन

किसकी की प्यास बुझाती हूं मैं

किस के काम आती हूं मैं

हर रात किसी की बनती मैं

हर शाम नया मैं रूप सजाती

इसीलिए मैं वेश्या कहलाती....!! 



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