STORYMIRROR

Supriya Devkar

Tragedy Others

3  

Supriya Devkar

Tragedy Others

किसान दुर्दशा

किसान दुर्दशा

1 min
268

मेरा खेत रो रहा है 

बात मुझसे कह रहा है 

देख मेरी दुर्दशा मालिक

मुझे रोना आ रहा है 

क्या बताऊँ खेत तुझको

मेरा हाल भी है तुझ जैसा

सब कुछ बह गया पानी में

आनंद ना रह गया अब कैसा

बच्चों की तरह संवारा तुमको

किया हर वक्त नया श्रृंगार

हरियाली देखकर जिता था

विरान दशा ने कर दिया बेकार

अब उम्मीद का बांध टूट गया है 

नहीं है सामने कोई आशा 

भरोसा खो रहा है मेरा 

चारों ओर घोर निराशा 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy