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Supriya Devkar

Abstract

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Supriya Devkar

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खूद पर काम करो

खूद पर काम करो

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सोचते रेहते हो हमेशा 

 जमाने के बारे में

अब वक्त है मिला

खुद पर काम करो 

झांक लो अपने अंदर

सोचो क्या अधूरा है

अब वक्त है मिला 

खुद को मजबूत करो

रखो पाने की चाह 

 क्या हाथ से छूट गया है 

अब वक्त है मिला 

खुद को मजबूर करो 

बता दो इस दुनिया को 

क्या हुनर है पास तुम्हारे 

अब वक्त है मिला 

खुद को मशहूर करो। 


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