STORYMIRROR

Sandip Kumar Singh

Thriller

4  

Sandip Kumar Singh

Thriller

ख्यालों की महल

ख्यालों की महल

1 min
300

दुनिया में कभी गम न आता काश,

छूते हम सब जन खुशियों से आकाश।


अपने जज्बातों को कागज़ पर उकेरता हूं,

चाहता हूं मेरी जज़्बात दुनिया में सब जाने।


चाहत सारे पूरा कर लूं अडिग हूं मैं,

बाधाएं न आती गर कुछ भी काश।


अपने अमृत भावनाओं को प्रत्येक जन तक पहुंचाता,

काश कुछ लोगों की बेवजह अर्चनें न आती।


वादों से अपने मैं मुकरता नहीं हूं,

काश ऐसा हरेक के मन में होता।


मैं बहुतों के लिए बहुत कुछ किया हूं,

काश उनलोगों को भी यह एहसास रहता।


ज़िंदगी जीने का मज़ा आ जाता, काश !

काश और आस को मिलाकर विजेता बन जाता।


सब कुछ अपने जैसा होता काश,

फिर धरा पर से कोई जाता ही नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Thriller