ख्यालों की महल
ख्यालों की महल
दुनिया में कभी गम न आता काश,
छूते हम सब जन खुशियों से आकाश।
अपने जज्बातों को कागज़ पर उकेरता हूं,
चाहता हूं मेरी जज़्बात दुनिया में सब जाने।
चाहत सारे पूरा कर लूं अडिग हूं मैं,
बाधाएं न आती गर कुछ भी काश।
अपने अमृत भावनाओं को प्रत्येक जन तक पहुंचाता,
काश कुछ लोगों की बेवजह अर्चनें न आती।
वादों से अपने मैं मुकरता नहीं हूं,
काश ऐसा हरेक के मन में होता।
मैं बहुतों के लिए बहुत कुछ किया हूं,
काश उनलोगों को भी यह एहसास रहता।
ज़िंदगी जीने का मज़ा आ जाता, काश !
काश और आस को मिलाकर विजेता बन जाता।
सब कुछ अपने जैसा होता काश,
फिर धरा पर से कोई जाता ही नहीं।
