"खुद पर काबू"
"खुद पर काबू"
जो इंसान पा लेता, खुद पर काबू
वो होता सबसे बड़ा, वीर लड़ाकू
जिनका खुद पर न चलता, जादू
वो क्या पार करेंगे, जरा सा टापू
जिनको है, भरोसा खुद पर बापू
वो लोग कभी न बहाते है, आंसू
जिनके भीतर जले, कर्मअग्नि धूं-धूं
वो दरिया मापने की रखते, आरजू
दुनिया में वो नहीं, ताकतवर-धांसू
जिसके बाजुओं में शक्ति, अगाधू
सच मे साखी वो है, सच्चे साधु
जो इंसान रखते, खुद पर काबू
बाकी तो दुनिया में बहुत है, काजू
जो कहते, हम जैसा न आजू-बाजू
साखी असली, महावीर वो है, बाबू
जिसका रहे, स्व इंद्रियों पर काबू
काम, क्रोध, लोभ आदि को हरा तू
यह हर इंसान को लूटते है, डाकू
तू मत बनना कभी जग में, फांकू
अगर तुझे बनना है फूल गुलाबू
करना सीख ले, खुद पर तू काबू
जलते हुए, अंगारों पर हंसेगा तू
दरिया को समझेगा, एक बूंद आंसू
जिस दिन पा लेगा तू, खुद पर काबू
जो अपने मन को बना लेते, तराजू
वो बनते, जग कीच में कमल-काजू।
