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Shipra Verma

Drama

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Shipra Verma

Drama

खिलखिलाहट निर्धन की

खिलखिलाहट निर्धन की

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पैसों से भले ही गरीब हूँ

शोषित हूँ, दीन, मलीन हूँ

भले मेरे पोर-पोर में दर्द है

पर प्रभु मेरे हमदर्द है।


हाथ थाम लेते हैं मेरे वो

ह्रदय से जब भी पुकारती हूँ

बेटा बनकर आ गए प्रभु

खुश हो हो उन्हें निहारती हूँ।


कभी आओ मेरी झोपड़ी में,

बड़ी सी खिलखिलाहट होगी

चारों ओर उजाला होगा

उदासी- कहीं नहीं होगी।


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