STORYMIRROR

Shipra Verma

Inspirational

4  

Shipra Verma

Inspirational

कच्छप

कच्छप

1 min
180

कच्छप मैं नील समंदर में

विशाल लहरियों से क्या भय

है मेरे पृष्ठ पर सुरक्षा छत्र

मैं जल थल का प्राणी द्वय


कोमल मेरे अंग अंग हैं पर

चट्टानों सा फौलादी मन है

पृथ्वी की तरह धीरज धारी

लंबा ही मेरा जीवन है


हरि ने भी था मेरा रूप लिया

मंथन समुद्र का सबने किया

इस नील जलधि में रत्न अनेक

मैं ज्ञान चक्षु से रहा हूँ देख! 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational