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Shipra Verma

Inspirational

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Shipra Verma

Inspirational

कच्छप

कच्छप

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कच्छप मैं नील समंदर में

विशाल लहरियों से क्या भय

है मेरे पृष्ठ पर सुरक्षा छत्र

मैं जल थल का प्राणी द्वय


कोमल मेरे अंग अंग हैं पर

चट्टानों सा फौलादी मन है

पृथ्वी की तरह धीरज धारी

लंबा ही मेरा जीवन है


हरि ने भी था मेरा रूप लिया

मंथन समुद्र का सबने किया

इस नील जलधि में रत्न अनेक

मैं ज्ञान चक्षु से रहा हूँ देख! 


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