STORYMIRROR

Shipra Verma

Classics

4  

Shipra Verma

Classics

रैन में बेचैन

रैन में बेचैन

1 min
311

रैन अंधियारी बादल नभ छाए

दामिनि दमकत् जिया डराये

नहीं आये पिया घर आंगना

कौ विधि मन को रही समझाए


पग पग पत्थर पर धर धर

वस्त्र संभाले चुनरी सर पर

केवल बिजलियाँ रोशन पथ में

निकली ढूँढने मोहन गिरधर


बाहर चाहे घोर अंधियारी

मन में प्रीत की उतनी उजियारी

हरि हो अंतर्मन में हृदय में जब

घर न फिरूँगी बिना मुरारी ! 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics