STORYMIRROR

Shipra Verma

Abstract

4  

Shipra Verma

Abstract

अरबी अश्व

अरबी अश्व

1 min
337

श्वेत शुद्ध नस्ल के दो अश्व

दोनों ही हैं मेरे पुत्र समान

अरब देश का मैं सौदागर

लोग कहें मुझे शेख पठान


इतने गुणशील उत्तम प्रकृति

उतना ही सदाचारी विवेकवान

जहाँ जहाँ भी जाता हूँ मैं इनके साथ

होती है मेरी विशिष्ट पहचान


दूर दूर देशों में भी इन अश्वों से

कोई सुन्दर अश्व नहीं लो मान

अपनी उद्दंडता तिरोहित कर दोनों ने

पकड़ाया है मुझे अपनी कमान


क्या संबंध है मेरा इन दो अश्वों से

कोई नहीं सकता है ये जान

इनसे मेरी, मेरी इन अश्वों से बनी है

कहाँ कहाँ तक की पहचान !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract