STORYMIRROR

Jayantee Khare

Drama

4  

Jayantee Khare

Drama

ख़्वाहिशों का ख़ून

ख़्वाहिशों का ख़ून

1 min
389

चल न सकी जब ज़िंदगी इश्क़ के जुनून से

ख़त्म हुई जंग मेरी ख़्वाहिशों के ख़ून से


क़त्ल हो गए हो तुम किसी की मुस्कान से

रुक सकी न मोहब्बतें कब किसी क़ानून से


मसले थे ज़ुदा ज़ुदा उम्र भर मग़र रहे

बतलाओ कौन जी सका है कभी सुक़ून से


याद भी किया अगर दुश्मनों की तरह

ख़त मिला तो जी उठे मतलब नहीं मज़मून से।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama