STORYMIRROR

Shayra dr. Zeenat ahsaan

Drama

4  

Shayra dr. Zeenat ahsaan

Drama

अमीर गरीब

अमीर गरीब

1 min
243

एक दिन अमीरी ने गरीबी से कहा

मैं वो हूं जो पूरी दुनिया को भाती हूं

एक पल में सबकी नजरों में चढ जाती हूं

सब का ख्वाब है मुझको पाना

मुझसे ही है ये सारा जमाना


मैं जिसके पास होती हूं उसके सिर पर

दुनिया का ताज होता है

उसके हर फैसले पर सबको नाज होता है

मेरे ठाट बाट के आगे सब के मुंह पर होते हैं ताले

मेरी ही वजह से तो चलते हैं कितने धंधे काले

सब कहते हैं मैं तो गुणों की खान हूं

सिर का ताज और सम्मान हूं

मैं पैसा हूं सबकी जान हूं


सुन कर के सारी बात गरीबी ने किए दो दो हाथ

मुस्कुराई फिर बोली

माना कि मैं गरीब हूं खाली है मेरी झोली

पर अपनी पर आ जाऊं तो ना लगा पाए कोई मेरी बोली

खुद्दार हूं अपनी अना में जीती हूं

तेरी तरह बेकसूरओं का खून नहीं पीती हूं


दुख दरिद्रता के अलावा इंसानियत मेरे पास है

गरीब हूं पर लोगों को फिर भी मुझसे आस है

हमारे ही दम पे ये महल और अटारी है

हम से ही ये दुनिया सारी है

दोनों की बहस में सुन रही थी

अपने सर को धुन रही थी

सोच रही थी ना कोई कम है ना ज्यादा

वही सफल है जिसका इंसानियत से है नाता।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama