कबूलनामा
कबूलनामा
कबूलनामा
मेरे दिल के बाग़ का तुम सबसे प्यारा फूल,
शायद ये मेरी भूल, पर है सच्चा उसूल।
अगर मेरी भूल को कर लो दिल से कबूल,
तो दुनिया में आने का मक़सद हो जाएगा वसूल।
दिल के बाग़ के फूल को जान से बढ़ाकर रखूँगा,
अरमानों का खज़ाना मैं सदा सँभालकर रखूँगा।
बस तुम्हारे इक़रार का ज़िंदगी भर इंतज़ार करूंगा,
याद रखना, तुम्हारे इनकार का सदमा मैं सह न सकूँगा।
तुम्हारे दिल के फूल को प्यार से सिंचेगा ये माली,
मेरे अरमानों की प्यार से भर दो बस तुम झोली।
किसी और के लिए नहीं रहेगा मेरा दिल खाली,
किसी और को चाहने से पहिले लो परीक्षा मेरी।
तुम्हारे इश्क के स्केल पट्टीपर,
अगर मैँ पा ना सका अव्वल नंबर।
खुद मैँ अपने को कर लूँगा तुमसे दूर,
फिर कभी ना रखूंगां कदम तेरे गली की और।
