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Arun Gode

Abstract

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Arun Gode

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प्रकृती का अनमोल रत्न

प्रकृती का अनमोल रत्न

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प्रकृती का अनमोल रत्न

तुम्हारी सागर से भी ये गहरी आंखे,

गहरी आँखों में डूबने को मजबूर हूँ।   

मेरे मंजिल मैँ उस में हमेशा डूबा रहूँ,

और तुम्हारे इश्क के ऊंचाई को छूँ।  


ये तुम्हारी आंखे नहीं कूदरत का खजाना,

इसे लूटने में ही लूटा दो जिंदगी का खजाना।  

इन आँखों का प्यार ना हो कभी खत्म,

मुझे संभाल रखना हैं ये प्रकृती का रत्न।

तेरे पायल की आहट से पहचान बनती है, 

आँखें बंद करूँ तो भी सुकून मिलता है। 

तेरी साँसों का स्पर्श बढ़ा दे धड़कन, 

क्यों जगाते हो दिल के छुपे अरमान। 



तेरी आँखें जैसे कुदरत का खजाना, 

वैसे ही मेरा दिल भी अनमोल ठिकाना। 

आओ सँभालें इस नायाब खजाने को, 

वरना ज़िंदगी भरना पड़ेगा हर्जाने को। 


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