Radha Shrotriya
Tragedy
अपने अपने समय की
सलाखों में कैद,
अपने कर्तव्यों की जंजीर के
बोझ तले दबा हुआ,
हर एक शख़्स
वो राजा हो या रंक
बंधुआ मजदूर है यहाँ !
वो बारिश की ब...
आइए आपको रचना...
दोस्ती
पहाड़ों पर रा...
किताबें
यादों की बौछा...
लॉकडाउन
उलझन मन की
प्रेम-पत्र
मन
बहुत कुछ सिखाया इस साल ने मुझे! बहुत कुछ सिखाया इस साल ने मुझे!
ऐसा आतंक देख कर , पूरा विश्व घबराया था वैश्विक शक्ति पर भी आतंकवाद छाया था !! ऐसा आतंक देख कर , पूरा विश्व घबराया था वैश्विक शक्ति पर भी आतंकवाद छाया था !...
इश्क के दरिया में, कोई नाम नहीं, गम के सिवा, कोई ईनाम नहीं। इश्क के दरिया में, कोई नाम नहीं, गम के सिवा, कोई ईनाम नहीं।
उसे लगा के मानो उसे नव-जीवन मिल गया हो उसे लगा के मानो उसे नव-जीवन मिल गया हो
क्या कमी थी मुझ में जो कूड़े दान में पाई गई क्या कमी थी मुझ में जो कूड़े दान में पाई गई
फूल से कोमल शरीर पर कर दिया दागों का निशान... फूल से कोमल शरीर पर कर दिया दागों का निशान...
दिखला कर झूठी हमदर्दी अपना भी बेदर्द हुआ है। दिखला कर झूठी हमदर्दी अपना भी बेदर्द हुआ है।
मुश्किलों के हर बादल, बहुत करीब है हम गरीब है पर खुशनसीब है मुश्किलों के हर बादल, बहुत करीब है हम गरीब है पर खुशनसीब है
ख़त्म-ख़त्म है जूनून, तन बदन निढाल है निचुड़ी सी आत्मा को निगल रहा काल है।। ख़त्म-ख़त्म है जूनून, तन बदन निढाल है निचुड़ी सी आत्मा को निगल रहा काल है।।
दादी माँ नेे इस कुल को अपने लहू से सींचा था! दादी माँ नेे इस कुल को अपने लहू से सींचा था!
हो सफल या असफल हो, परीक्षाएँ भी जरूरी है, हो सफल या असफल हो, परीक्षाएँ भी जरूरी है,
यहाँ घुटता रहेगा तू हमेशा तेरे लायक नहीं ये दर निकल आ यहाँ घुटता रहेगा तू हमेशा तेरे लायक नहीं ये दर निकल आ
किसी ने इसांनियत छोड़ी थी! बेर्शमी की हर हद तोड़ी थी! किसी ने इसांनियत छोड़ी थी! बेर्शमी की हर हद तोड़ी थी!
तुम कैसे सुकून से जी पाते यदि तुम्हारे भी अंग खरोचें जाते तुम कैसे सुकून से जी पाते यदि तुम्हारे भी अंग खरोचें जाते
यही उसका परम पुरुषार्थ है ,"अध्यात्म" यही कहलाता है।। यही उसका परम पुरुषार्थ है ,"अध्यात्म" यही कहलाता है।।
प्यार की बात नेपथ्य में जा खो गई फिर न जाने कहाँ। प्यार की बात नेपथ्य में जा खो गई फिर न जाने कहाँ।
तोड़ दो उन तमाम बंदिशों को, खुद के लिये, भरो एक और उड़ान, बस खुद लिए, तोड़ दो उन तमाम बंदिशों को, खुद के लिये, भरो एक और उड़ान, बस खुद लिए,
अंधेरों में रोशनी, खुशनशीब जिंदगी, जीने की राह, मंजिल-ए-आसान। अंधेरों में रोशनी, खुशनशीब जिंदगी, जीने की राह, मंजिल-ए-आसान।
मेरी सब उलझनों को चुटकियों में सुलझाती थी मेरी बड़ी बहन मेरी माँ के समान थी मेरी सब उलझनों को चुटकियों में सुलझाती थी मेरी बड़ी बहन मेरी माँ के समान थी
ना जाने और कितना तड़पायेगी ये ज़िंदगी, मजदूर की मजबूरी को कितना आजमाएगी। ना जाने और कितना तड़पायेगी ये ज़िंदगी, मजदूर की मजबूरी को कितना आजमाएगी।