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Lokanath Rath

Tragedy Inspirational

4  

Lokanath Rath

Tragedy Inspirational

काश आप होते तो

काश आप होते तो

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ऐसे तो कभी सोचा ही नहीं था 

की सूबे की ठंडी हवा मेरे खिड़की खोल दी 

नजर उठाके देखा हलकी सी रोशनी दिखाई दी 


मीठी मीठी ठंडी हवाएँ ओठों पे थोड़ी मुस्कान दी 

"काश आप होते तो "सोच को बिराम देते. 

ये सूरज भी कितना प्यारा है, किरण बिखरता है 

अनजाने मे कित्नोको छू जाता रोशन फैलता है 

ये रोशनी छोटी है पर कब मन की आंगन मे बस जाता है 


ओर फिर दिल को भी ये छू जाता है 

कुछ मधुर तान ओर सुरु की मिलन करता है 

फिर एक सुन्दर संगीत की आगा कराता है 

"कास आप होते तो "सोच 

को बदल देते


पुराने यादों को मे पढ़ने लगा 

वो दिन कितने सुन्दर थे सोचने लगा 

जब आप सूरज की रोशनी जैसे लगने लगा 

कित्नोकि ज़िन्दगी के अँधेरे आप की रोशनी से भागने लगा 

आप की वो बाते आप की वो सक्ति अब मे देखने लगा 


आप की शब्दों में लिखी किताब अब मे पढ़ने लगा 

बिना तान ओर गान फिर मेरा मन नाचने लगा 

जीने की अरमान अब फिर से बढ़ने लगा 

जी भरके संसार मे सारे खुशियाँ बाँटने को दिल मे जगा 


समय के साथ हर पल को मीठी यादों मे रखने सोचने लगा 

अब हलके से उठा ओर खिड़की खोलने लगा 

ठंडी हवाएं के साथ सूरज की रौशनी ओर सुन्दर लगने लगा 

ये सुबह की चमक अब कुछ मुझे कहने लगा 

"काश आप होते तो " ओर कुछ सोच मन मे भर देते। 


 ये जीबन तो आप से सुरु ओर आप की देन 

आप ने ही तो संभाला सजाया मुझे हर दिन 

आप की सिख से मिला आगे बढ़ने का सगुन 

वो आप ही तो थे हर मुश्किल मे मन को दिए सुकून 


आप की आंचल की छाये ने बचाया हर पल हर दिन 

आप इतने दूर चले गये की इंतजार मे मेरे नयन 

सायद कुछ मुझसे गलती हुई या आप पाए निर्बान 

फिर भी आप हो मेरे साथ कहता है मेरे उदास मन 

"काश आप होते तो " बुझता मेरा ये अकेलापन।


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