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Chandresh Kumar Chhatlani

Tragedy

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Chandresh Kumar Chhatlani

Tragedy

कार्बन बच रहा है

कार्बन बच रहा है

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कुछ किताबें पेन की चोट से मर जाती हैं

कुछ किताबों को पेन कर देता है ज़िंदा।

पेन से लिखी किताबों ने ही,

पहले पेन को छोड़ा,

अब कागज़ को।

पेड़ तो बचे,

लेकिन बचे हुए पेड़,

टाईप हो रही किताबों के मोबाइल, कंप्यूटर से,

निकल रहे कार्बन से कहीं मर ना जाएं।

इससे बेहतर है, 

मैं पेन को ही मार दूं,

या फिर कविता को ही।

चलती रहे कविता,

कानों से कानों तक,

ज़ुबान से कानों तक।


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