STORYMIRROR

Ajay Gupta

Abstract

3  

Ajay Gupta

Abstract

कार चलाते चलाते

कार चलाते चलाते

1 min
160

शहर के भीड़भाड़ में, 

हॉर्न की कर्कश आवाजों के बीच 

थक चला हूँ मैं

यूँ कार चलाते चलाते 


बस रेंगते रेंगते 

ब्रेक पर यूँ ही पांव दबाये दबाये 

आसपास की गाड़ियों को देख

बंध सा गया हूँ मैं 

यूँ कार चलाते चलाते 


बीच बीच से लोगों का घुस जाना 

ऑटो बाइक का थोड़ी जगह देख घुसना

कहीं बाइक से छू जाना 

फिर उसका जोर से चिल्लाना 

तंग आ गया हूँ मैं 

यूँ कार चलाते चलाते


पार्किंग के लिए इधर उधर भटकना 

नो पार्किंग पर भी जगह ना पाना 

अपने मंजिल से दूर गाड़ी लगा 

पैदल ही चल कर वापस आना 

तंग आ गया हूँ मैं 

यूँ कार चलाते चलाते


मन करता है यह 

भीड़ वाली सड़क छोड़ 

रेसिंग ट्रेक पर जाऊँ 

और ब्रेक से छोड़ पांव 

एक्सीलेटर ही केवल दबाऊं

मजा का मजा लूँ मैं 

रेसिंग कार चलाते चलाते।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract