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GOPAL RAM DANSENA

Abstract


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GOPAL RAM DANSENA

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अक्सर

अक्सर

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ख़यालों में बालू की तरह

टटोला कराता हूँ यादों को

ढेर बालू का आंसू से ऊपर ही ऊपर

टीले बने थे अभी धंसे जाते हैं अक्सर I


तुम जीवन धन तुम्हीं से खुशी है

बदल जाती हैं भावनाएं भंवर

कभी तुम में कभी किसी पर

किसे गिनें काफिले बसे जाते हैं अक्सर I


सुना है शबरी के बेर न जूठे होते हैं

सुना है अपने कुछ देर ही रूठे होते हैं I

फिर पीढ़ियां गुजर जाती हैं दो किनारों पर

वक्त की खंजर दिल में धसे जाते हैं अक्सर I


तुम मानो एहसान, न हम मानेंगे

तुम मांगो वक्त से एहसान, न हम मांगेंगे

पत्थर में बदला जो वक्त के थपेड़ों से इंसा

उसके आँखों से आँसू क्यों बहे जाते हैं अक्सर I



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