STORYMIRROR

ATUL MISHRA

Abstract

4  

ATUL MISHRA

Abstract

ख्वाहिश या गुजारिश

ख्वाहिश या गुजारिश

1 min
213

जो उम्र भर दे सको मुझे,

वो ही,पहली बार देना।।


किफायत की इनायत न हो जिसमें,

बस उतना ही , प्यार देना।।


क्या मीनार, क्या दीनार,

मुझे बस, एक नजर निहार देना।।


और,हाॅं! बस ताउम्र का हो साथ,

उसे नाम चाहे यार देना ।।


खुशियों में तो खुश रहते हैं सब,

ग़म में भी हमें मुस्कान देना।।


चाहते हो न! ज़िन्दगी न हो मुझसे जुदा।

तो खुद को मेरा ,मुकाम देना।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract