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Kanak Agarwal

Tragedy

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Kanak Agarwal

Tragedy

काल

काल

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काल के इस रथ पर

जीत हुई है सदा ही

उद्वेग की, अविवेक की !!!

सोचा है जिसने भी

एक पल ठहर कर.. 

वो न कर पाया खुद को मुक्त

विवेक की बेड़ियों से..

ड़ाल दिए बंधन मर्यादा ने !!!

और वो कर बैठा समर्पण

काल के आगे.......!!! 



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