STORYMIRROR

Swaraangi Sane

Drama

3  

Swaraangi Sane

Drama

जरा सी आँच

जरा सी आँच

1 min
477

मैंने चाहा धूप को पकड़ना

वैसे ही जैसे          

कोई चाहे सुख को

या अपने प्यारे दोस्त को।

            

मैं नहाती रही गुनगुनेपन में उसके

और टोहती रही अंधेरा

धूप से दूर मैं कई लोगों के साथ थी

सभी अपने अपने अंधेरे में कैद

जरा-सी आँच को। 

 

मान रहे थे पूरी धूप

मैंने भी झिरी से आती धूप को

पूरी समझा

और बंद कर किवाड़

सोचा बंद हो गई वह

आज फिर उसे पाने का मन करता है !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama