STORYMIRROR

praveen ohdar

Tragedy Thriller

4  

praveen ohdar

Tragedy Thriller

जख्म

जख्म

1 min
191

कौन कहता है, मौत आएगी तो मर जाऊंगा

मै तो दरिया हूँ , समंदर में उतर जाऊंगा।


तेरा दर छोड़ के में और किधर जाऊंगा

घर में घिर जाऊंगा, सहरा में बिखर जाऊंगा।


अब तेरे शहर में आऊंगा मुसाफिर की तरह

साया-ए-अब्र की मानिंद गुजर जाऊंगा।


चारासाजो से अलग है गिरा में यार कि 

मैं जख्म खाऊंगा तो कुछ और सवंर जाऊंगा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy