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praveen ohdar

Tragedy Thriller

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praveen ohdar

Tragedy Thriller

जख्म

जख्म

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कौन कहता है, मौत आएगी तो मर जाऊंगा

मै तो दरिया हूँ , समंदर में उतर जाऊंगा।


तेरा दर छोड़ के में और किधर जाऊंगा

घर में घिर जाऊंगा, सहरा में बिखर जाऊंगा।


अब तेरे शहर में आऊंगा मुसाफिर की तरह

साया-ए-अब्र की मानिंद गुजर जाऊंगा।


चारासाजो से अलग है गिरा में यार कि 

मैं जख्म खाऊंगा तो कुछ और सवंर जाऊंगा।


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