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V. Aaradhyaa

Tragedy

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V. Aaradhyaa

Tragedy

जिस घर में गृहलक्ष्मी रोए

जिस घर में गृहलक्ष्मी रोए

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जब घर का प्रमुख ही भेदभाव दिखाए,

       तब घर में हालत क्या होगी खुशहाली की।

जिस घर में घर की लक्ष्मी रोए ,

      वो घर तो ज़रूर होगा बदतर बदहाली की!


जिस बाग का फूल मुरझाए,

             ज़रा पूछो हालत माली की ।

जिस घर में घर की स्त्रियां रोए,

             वो घर है बदतर बदहाली की ।।


जबसे अपने हुए पराए,

              दर्द हुआ है सीने में ।

सभी लगे हैं घर तुड़वाने ,

             तकलीफ़ हुई जीने में ।।


कर आपस में जो टकराए,

           गलती क्या है ताली की ।

जिस घर में घर की स्त्रियां रोए,

             वो घर है बदतर बदहाली की ।।


आजाद नहीं हैं बंधन से,

             पूछो ढ़ोल मजीरा से ।

ज़हर छुपा है कितना उसमें,

             पूछो तुम उस हीरा से ।।


मर्द नशे में धुत्त रहे तो,

             दोष नहीं घरवाली की ।

जिस घर में घर की स्त्रियां रोए,

             वो घर है बदतर बदहाली की ।।


जीवन सुख दुःख का संगम,

        कभी अंधेरा तो कभी उजियाली की।

जिस घर में घर की लक्ष्मी रोए ,

        वो घर है बदतर बदहाली की !

             


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