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Dinesh Dubey

Tragedy

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Dinesh Dubey

Tragedy

जिंदगी सेल पर

जिंदगी सेल पर

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ये जिंदगी है सेल पर ,

जितना चाहो बेच लो,

रिश्तों के टारगेट को ,

पूरा करने में खुद को झोंक दो।

पत्नी है बॉस हमारी ,

डेली रिपोर्टिंग है लेती वो,

बच्चे हैं इंसेटिव जैसे ,

नित नए डिमांड करते हैं।

जवानी बितता कमिटमेंट में ,

जो पूरा कभी ना कर पाते,

बचता ना कोई अचीवमेंट ,

अपने ही बुढ़ापे के लिए।

पत्नी बच्चे मां बाप सब ,

एक ही सवाल है पूछते,

क्या किया है तुमने हमारे लिए,

हर बात पर ताने देते ,।

समझ ना पाया अब तक कोई,

उसने किसके लिए क्या किया ,

क्या वह अब तक सिर्फ ,

अपने लिए ही जिया,।

खुद पर कभी ना खर्चा किया ,

अपनो के लिए कर्ज लिया ,

भर भर के बस जान ही बची,

उस पर भी है बवाल मची।



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