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Babu Dhakar

Inspirational

4  

Babu Dhakar

Inspirational

जिन्दगी (2)

जिन्दगी (2)

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कुछ धूप तो कुछ छांव है जिन्दगी

कुछ रूप तो कुछ कुरूप है जिन्दगी

धूप में रूप की बनी परछाई है जिन्दगी

छांव में कुरूप की बनी कोयलाई है जिन्दगी।


कोयल कहती कि कौआ काला

बगुले ने यहां हंस को मार डाला

तम ने भले काम तमाम कर डाला

तम मिटाने आता वो कान्हा काला।


आती है आंधी, धूल संग में बरसात लाती

आती है रात, अंधेरे संग में आराम देती

आती है हवा, शीतलता संग बहार लाती

आती है धूप, रूप संग जिन्दगी देती।


आती सफलता, सुख के संग अहंकार लाती

आती असफलता, दुःख के संग क्षमताएं बताती

आती नफरत, हया के संग इज्जत बढ़ाती

आती हया, बेशर्मी के संग पर्दा करती।


कुछ क्षय तो कुछ अक्षय है जिन्दगी

कुछ पल तो कुछ सफल है जिन्दगी

कुछ गम तो कुछ संगम है जिन्दगी

कुछ सम तो कुछ विषम है जिन्दगी।


कहीं सार तो कहीं संसार है जिन्दगी

कहीं हार तो कहीं बहार है जिन्दगी

कहीं मान तो कहीं अपमान है जिन्दगी

कहीं मत तो कहीं मतलब है जिन्दगी।


कुछ कम तो कुछ ज्यादा है जिन्दगी

कुछ खत्म तो कुछ उत्तम है जिन्दगी

कुछ कम में और प्राप्त की चाहत है जिन्दगी

कुछ तम में प्रकाश की आहट है जिन्दगी


कहीं लय तो कहीं प्रलय है जिन्दगी

कहीं भय तो कहीं निर्भय हैं जिंदगी

कहीं आस तो कहीं निराश हैं जिंदगी

कहीं पास तो कहीं टाइम पास हैं जिन्दगी।


कुछ सत्य तो कुछ असत्य हैं जिन्दगी

कुछ तथ्य तो कुछ कथ्य हैं जिन्दगी

कुछ प्रेम तो कुछ भ्रम है जिन्दगी

कुछ प्रश्न तो कुछ उत्तर है जिन्दगी।


कुछ धूप तो कुछ छांव है जिन्दगी

कुछ रूप तो कुछ कुरूप है जिन्दगी

धूप में रूप की बनी परछाई है जिन्दगी

छांव में कुरूप की बनी कोयलाई है जिन्दगी।


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