STORYMIRROR

Shailaja Bhattad

Romance

3  

Shailaja Bhattad

Romance

जीवन संगीत

जीवन संगीत

1 min
262

ढूंढती है रंगीनियाँ मुझे तुझसे मिलाने को

तुझे मेरी आदत बनाने को


बादलों से चुरा लाई है हवाएं

खामोशियों की आवाज बनाने को


हर बात में तुम्हारा ही जिक्र लाने को

इन आंखों में तुम्हारी ही फिक्र बसाने को


इन पलकों की शहजादी तुम बनो

आंखों से ही मुझसे बातें सारी करो


कितने ख्वाब सजा लिए हैं

आंखों में सब बसा लिए हैं

हकीकत तुम बना दो

साज कोई सजा लो


सूरज ना ढले बस आती रहो

जीवन को संगीत बनाती रहो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance