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ज्योति किरण

Romance


5.0  

ज्योति किरण

Romance


जीवन नदी

जीवन नदी

1 min 146 1 min 146

हृदय ध्वनि भी तीव्र हो चली,

सांस हो चली गहरी है।

समय का दरिया अविरल बहता,

जीवन नदी क्यूँ ठहरी है।।


आसमान में बिखरे हैं मोती,

बादल जैसे प्रहरी है।

यादें तुम्हारी ले कर आई

फिर वही शाम सुनहरी है।।


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