STORYMIRROR

Jyoti Naresh Bhavnani

Classics

4  

Jyoti Naresh Bhavnani

Classics

जीवन के बाद का सच

जीवन के बाद का सच

1 min
323

#prompt 

#टीम E

#विषय: जीवन के बाद

#नॉन स्टॉप नवंबर T 30 कप संस्करण

#शीर्षक: जीवन के बाद का सच


जीवन के बाद का सच क्या है?

ये सच्चाई यहां कोई ना जाने,

आंख बंद होने के बाद होता क्या है?

ये भेद यहां कोई ना जाने।


पर इतना तो अवश्य ही तय है यहां कि,

मरने के बाद अपने हो जाते हैं बेगाने।

साथ रहते थे जो हरदम ही अपने,

वो ही भूल जाते हैं गुज़रे ज़माने।


यहीं के यहीं रह जाते हैं सभी ही,

वो थे जो कभी दिलों के अफसाने,

मरने के बाद यहां पे फिर कभी,

कोई हमको नहीं है पहचाने।


खत्म हो जाते हैं वो सारे रिश्ते ही,

लगे थे उम्र भर हम जिनको बनाने।

छूट जाता है सब कुछ पीछे ही,

आखिर किसी न किसी बहाने।


टूट जाते हैं फिर सारे बंधन ही,

लगे रहते थे हम जिनको हरदम बांधने,

छूट जाता है वो सब कुछ पीछे ही,

जिनको रखते थे हम हरदम नज़रों के सामने।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics