STORYMIRROR

कुमार संदीप

Drama

3  

कुमार संदीप

Drama

जीवन का सफर

जीवन का सफर

1 min
248

हमेशा जिन्हें देखा

घमंड की चादरों से लिपटे

पैसों से तौलते गरीबों को 

संपत्ति और दौलत से पूर्ण।


उस इंसान को जब देखा मैंने

मरने के बाद

राख में परिवर्तित होते हुए 

सबकुछ मिट चुका था उसका। 


वो घमंड, वो रुतबा

वो संपत्ति, वो शख्सियत

कुछ बच गया था तो वो था पहचान

जो कर्मों द्वारा यहाँ बनाकर 

गया था।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama