STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Drama Tragedy

3  

V. Aaradhyaa

Drama Tragedy

झूठ संप्रेषित सच की हुंकार

झूठ संप्रेषित सच की हुंकार

1 min
144

बुराई पर अच्छाई की जीत की पुकार हूँ,

झूठ को संप्रेषित करती सत्य का हुंकार हूँ!


मैं अब कोई निपट मिथ्या भरम नहीं साकार हूँ,

मैं एक स्वनिर्मित और सुनिश्चित सा आकार हूँ !


 कहीं कागज़ पर व्यथित शब्दों की चीत्कार हूँ ,

तो कहीं फूल के संग पनपता हुआ सुगंधित हार हूँ !


अन्याय के नीचे दबे न्याय की गुंजती हुई दहाड़ हूँ,

मैं खुद से जन्मी हूँ और खुद अपनी ही अवतार हूं!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama